डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने अपनी निर्धारित योजना के अनुरूप सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने इसे केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, वैज्ञानिक प्रतिभा और उद्योग जगत की बढ़ती भूमिका का भी प्रमाण बताया। उनका कहना था कि इस उपलब्धि से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच समन्वय से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग पांच-छह वर्ष पहले केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। इस नीति के बाद देश में नई कंपनियों को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग उसी दूरदर्शी निर्णय का सकारात्मक परिणाम है, जिसने भारतीय स्पेस इकोसिस्टम को नई दिशा दी है।
मंत्री ने इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़े सभी संस्थानों और वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से ऑर्बिटल लॉन्च करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनकर नया इतिहास बनाया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रभावी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है और आने वाले वर्षों में ऐसे कई नवाचार देखने को मिल सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण, इसरो और मिशन से जुड़े सभी तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के सहयोग और मार्गदर्शन ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत मंच उपलब्ध कराया है। उनके अनुसार यह मॉडल भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में जिस गति से प्रगति की है, वह उल्लेखनीय है। सामान्य तौर पर स्पेस सेक्टर में बड़े परिणाम हासिल करने में कई दशक लग जाते हैं, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत कम समय में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। उनका मानना है कि यह सफलता देश की नीतिगत स्पष्टता, वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली व्यवस्था का परिणाम है।
मंत्री ने कहा कि जिन देशों ने भारत से कई दशक पहले अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किए थे, उनकी तुलना में पहली कोशिश में सफलता प्राप्त करने का भारत का रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा है। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग इस उपलब्धि को और मजबूत करती है तथा यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह सफलता भारतीय निजी स्पेस उद्योग के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करने के साथ-साथ देश की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान देती है।
