मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में दोपहर तक लगभग आधा प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्रति 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.44 लाख रुपये के पार पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह इससे नीचे बंद हुआ था। इसी दौरान भौतिक बाजार में भी सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला और विभिन्न कैरेट के सोने के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुद्धता के आधार पर 24, 22, 20, 18, 16, 14, 12 और 10 कैरेट सोने की कीमतों में अलग-अलग स्तर पर तेजी देखने को मिली।
देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दामों में मामूली अंतर बना रहा। दिल्ली, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर रहा, जबकि मुंबई, कोलकाता, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में कीमतें इससे कुछ कम दर्ज की गईं। चेन्नई में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सोने का भाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। 22 और 18 कैरेट सोने के दामों में भी इसी प्रकार का अंतर देखने को मिला, जो स्थानीय करों और बाजार परिस्थितियों के कारण सामान्य माना जाता है।
बाजार जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव के कारण निवेशक लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि जैसे कारकों ने सोने की तेजी को सीमित करने का भी काम किया है। यही कारण है कि दिनभर बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा।
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई निवेशकों ने अल्पकालिक लाभ के लिए मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना। वहीं दूसरी ओर वैश्विक अस्थिरता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, जिससे गिरावट के बाद कीमतों में फिर सुधार देखने को मिला।
पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी और वायदा बाजार में भी तेज कमजोरी देखने को मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर और वायदा दोनों प्रकार के सोने के भाव दबाव में रहे थे। इसके बावजूद गुरुवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नई खरीदारी और बदलते वैश्विक संकेतों ने कीमतों को फिर सहारा दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय बाजार के व्यापक संकेतों पर नजर रखते हुए निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।
