नई व्यवस्था नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक पर आधारित होगी। इस प्रणाली में उपयोगकर्ता को QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि स्मार्टफोन में NFC की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल उसे भुगतान मशीन के पास टैप करने से लेनदेन पूरा किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के दौरान न तो ग्राहक के मोबाइल में सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक होगा और न ही व्यापारी के भुगतान टर्मिनल को इंटरनेट से जुड़े रहने की जरूरत होगी। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।
इस सुविधा के शुरुआती चरण में एक बार में अधिकतम 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट उपलब्ध होने के दौरान पहले अपने UPI Lite वॉलेट में राशि जोड़नी होगी। बाद में उसी बैलेंस का उपयोग ऑफलाइन भुगतान के लिए किया जा सकेगा। सीमित राशि वाले इन लेनदेन में बार-बार UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है, जिससे छोटी खरीदारी पहले से अधिक तेज गति से पूरी की जा सकेगी।
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उन स्थानों पर मिलेगा, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होती। हवाई यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता या अंडरग्राउंड मेट्रो में नेटवर्क बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी यात्री आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां मोबाइल नेटवर्क अक्सर कमजोर रहता है, वहां भी यह सुविधा डिजिटल भुगतान को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।
हालांकि इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल ग्राहकों के स्मार्टफोन में NFC सुविधा होना पर्याप्त नहीं होगा। व्यापारियों के पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनलों को भी नए मानकों के अनुसार प्रमाणित किया जाएगा। इसके बाद बैंक और विभिन्न UPI एप्लीकेशन अपने प्लेटफॉर्म पर इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराएंगे। इससे पूरे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को नए तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
फिलहाल यह सुविधा विकास और परीक्षण के चरण में है तथा आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसकी आधिकारिक लॉन्च तिथि की भी अभी घोषणा नहीं हुई है। हालांकि तकनीक पर तेजी से काम जारी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा शुरू होने के बाद भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा नेटवर्क संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले भुगतान विफल होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे डिजिटल लेनदेन का दायरा और बढ़ेगा तथा उपयोगकर्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित और सहज भुगतान का नया विकल्प मिलेगा।
