सिर्फ सामान्य वजन होना या रोजमर्रा के काम आसानी से कर पाना हमेशा अच्छी सेहत की गारंटी नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना किसी खास संकेत के रह सकते हैं। इसी तरह प्रीडायबिटीज और डायबिटीज भी शुरुआती चरण में कई लोगों में बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती है। इसलिए केवल बाहरी फिटनेस के आधार पर अपनी सेहत का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की गाइडलाइन के अनुसार, बिना लक्षण वाले लोगों में भी 30 वर्ष की उम्र के बाद डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल की जांच पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति को कितनी बार और कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए, यह उसकी उम्र, पारिवारिक इतिहास और स्वास्थ्य जोखिमों के आधार पर अलग हो सकता है।
भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा महत्वपूर्ण है। ब्लड शुगर बढ़ने के बावजूद कई लोगों को लंबे समय तक प्यास अधिक लगना, बार-बार पेशाब आना या अत्यधिक थकान जैसे स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग से ब्लड शुगर में होने वाले बदलाव का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
परिवार में अगर किसी सदस्य को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अधिक वजन की समस्या रही है तो 30 वर्ष के बाद स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहना जरूरी हो जाता है। पारिवारिक इतिहास के साथ कम शारीरिक गतिविधि, असंतुलित खानपान और अधिक वजन जैसे कारक भी मेटाबोलिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि बहुत से लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। सिरदर्द या चक्कर नहीं आ रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लड प्रेशर सामान्य है। इसी तरह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी आमतौर पर कोई खास लक्षण नहीं देता और इसका पता रक्त जांच के जरिए लगाया जाता है।
सामान्य वजन वाले लोगों को भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उन्हें मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा नहीं है। शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान, धूम्रपान और पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास जैसे कारण सामान्य वजन के बावजूद जोखिम बढ़ा सकते हैं।
30 वर्ष के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। डायबिटीज की स्क्रीनिंग और जोखिम के अनुसार लिपिड प्रोफाइल भी कराया जा सकता है। डॉक्टर आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, खानपान और ब्लड प्रेशर जैसे कारकों को देखकर तय कर सकते हैं कि आपके लिए कौन-कौन से परीक्षण जरूरी हैं।
अगर लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान शुरुआती चरण में की जा सकती है।
