नई दिल्ली ।बिहार के सीवान जिले में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की तरफ से एके-47 राइफल से की गई फायरिंग का मामला अब राज्य की राजनीति और पुलिस प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में जहां तीखी बयानबाजी और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन को भी अपनी सुरक्षा नीति और भीड़ नियंत्रण के तरीकों में व्यापक बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पूरे मामले की शुरुआत सीवान में छात्रों के एक बड़े प्रदर्शन के दौरान हुई, जब पुलिस बल द्वारा कथित रूप से स्वचालित हथियार से गोलियां चलाई गईं।
इस घटना के दौरान पुलिस की कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें एक पुलिसकर्मी को एके-47 राइफल से प्रदर्शनकारियों की तरफ गोलियां चलाते हुए देखा गया। इस गोलीबारी की चपेट में आने से तीन स्थानीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के तुरंत बाद पुलिस विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिस जवान को सेवा से निलंबित कर दिया और मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए। हालांकि, विपक्ष इस पूरी कार्रवाई को महज एक औपचारिकता मान रहा है और सरकार की नीयत पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।
घटना के विरोध में बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि आखिर किस अधिकारी के आदेश पर निहत्थे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एके-47 जैसे खतरनाक असॉल्ट हथियार का इस्तेमाल किया गया। तेजस्वी यादव का तर्क है कि केवल एक निचले स्तर के पुलिस जवान को निलंबित कर देने से इतनी बड़ी घटना की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। इस मामले में उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इस तरह का आदेश दिया या स्थिति को सही तरीके से नियंत्रित करने में नाकामी दिखाई।
इसी मांग को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने 19 अगस्त को राज्य की राजधानी पटना में एक विशाल राजभवन मार्च आयोजित करने की आधिकारिक घोषणा की है। पार्टी नेताओं के अनुसार, इस विरोध मार्च में पार्टी के सभी सांसद, विधायक, विधान पार्षद और राज्यभर से आए हजारों की संख्या में कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। यह मार्च पटना स्थित पार्टी कार्यालय से शुरू होकर राजभवन तक जाएगा, जहां राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में टकराव और ज्यादा बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ, इस बड़े विवाद और चौतरफा दबाव के बीच बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नीति में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नए दिशानिर्देशों के तहत अब राज्य भर में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति या भीड़ नियंत्रण की ड्यूटी के दौरान एके-47, इंसास और एसएलआर जैसे घातक असॉल्ट हथियारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। राज्य के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए पत्र भेजा गया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
पुलिस मुख्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इन घातक हथियारों का इस्तेमाल अब केवल उग्रवाद, आतंकवाद, नक्सल विरोधी अभियानों या बड़े और खूंखार अपराधियों के खिलाफ चलाए जाने वाले विशेष अभियानों में ही किया जा सकेगा। सामान्य सार्वजनिक प्रदर्शनों, जुलूसों या भीड़ को संभालने के लिए पुलिसकर्मियों को केवल मानक और अहिंसक सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां तक कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में पुलिस जवानों के पास ये हथियार मौजूद भी रहते हैं, तब भी भीड़ पर इनका प्रयोग किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकेगा। इस नई नीति का असर देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस नीतियों के तुलनात्मक अध्ययन के रूप में भी देखा जा रहा है।
