चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोप तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि चीन को बदनाम करने के उद्देश्य से इस प्रकार के बयान दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार चीन हमेशा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है और अमेरिकी चुनाव उसके लिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने का विषय नहीं हैं।
चीन ने अमेरिका से अपील की कि वह चुनावी राजनीति में चीन का नाम घसीटना बंद करे और दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करे। प्रवक्ता ने संकेत दिया कि यदि दोनों देश स्थिर और रचनात्मक संबंध चाहते हैं तो आरोप-प्रत्यारोप की बजाय संवाद और सहयोग पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन का दौरा कर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नए संवाद तंत्र पर सहमति जताई थी। इसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे की भी तैयारी चल रही है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिकी चुनावी प्रणाली को प्रभावित करने के उद्देश्य से करोड़ों मतदाताओं का डेटा अवैध रूप से हासिल किया। उनके अनुसार इस कथित डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक संबद्धता और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां शामिल थीं। ट्रंप ने दावा किया कि इन सूचनाओं का उपयोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास चीन की कथित गतिविधियों से संबंधित जानकारी थी, लेकिन वह पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ रिपोर्टों में चीन द्वारा अमेरिकी कारोबारी नेताओं और मीडिया से जुड़े लोगों को प्रभावित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं शीर्ष स्तर तक समय पर नहीं पहुंचाई गईं।
हालांकि चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि ऐसे दावों का कोई आधार नहीं है। बीजिंग का कहना है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों का समाधान संवाद और आपसी सम्मान के माध्यम से होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे में चुनावी हस्तक्षेप जैसे आरोप दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौती पैदा कर सकते हैं।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण यह विवाद कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में उच्चस्तरीय बैठकों और आधिकारिक संवाद के दौरान इस मुद्दे पर दोनों पक्षों का रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जाएगा।
