सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूजर की पसंद के अनुसार कंटेंट दिखाया जाता है। इससे लोगों को अपनी रुचि से जुड़ी जानकारी हासिल करने, नई चीजें सीखने और समान विचारों वाले लोगों से जुड़ने का मौका मिलता है। लेकिन यही सुविधा कई बार आदत का रूप ले लेती है। लोग बिना किसी खास उद्देश्य के फोन खोलते हैं और एक वीडियो देखने के बाद लगातार दूसरे वीडियो देखते चले जाते हैं। शुरुआत में कुछ मिनट के लिए खोला गया फोन कब आधे या एक घंटे तक इस्तेमाल होने लगता है, इसका पता भी नहीं चलता।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ फीचर यूजर्स को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें इंफिनिटी स्क्रॉल प्रमुख है। इस सुविधा के कारण कंटेंट लगातार सामने आता रहता है और यूजर बिना रुके नीचे स्क्रॉल करता रहता है। इसी तरह ऑटोप्ले फीचर एक वीडियो खत्म होते ही अगला वीडियो अपने आप शुरू कर देता है। कई बार यूजर का अगला वीडियो देखने का कोई इरादा नहीं होता, लेकिन ऑटोप्ले के कारण वह स्क्रीन पर बना रहता है।
पुश नोटिफिकेशन भी लोगों का ध्यान भटकाने का एक बड़ा कारण बन सकते हैं। मैसेज, लाइक, कमेंट और नई पोस्ट की सूचना मिलते ही लोग अपना काम छोड़कर फोन देखने लगते हैं। धीरे-धीरे यह व्यवहार आदत में बदल सकता है और व्यक्ति जरूरत के बजाय नोटिफिकेशन मिलने पर फोन उठाने लगता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर लाइक्स, फॉलोअर्स, स्ट्रीक्स, रिमाइंडर्स और पर्सनलाइज्ड फीड जैसे फीचर भी यूजर्स को लगातार प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने में भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि फोन का इस्तेमाल वास्तविक जरूरत के लिए किया जा रहा है या केवल अगला कंटेंट देखने की आदत के कारण।
डिजिटल संतुलन बनाए रखने का मतलब स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं है। इसका उद्देश्य तकनीक को अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना है। फोन उठाने से पहले यह तय करना चाहिए कि उसका इस्तेमाल किस काम के लिए किया जा रहा है। पढ़ाई, काम, जरूरी जानकारी या बातचीत के लिए फोन का उपयोग करना उपयोगी हो सकता है, लेकिन बिना किसी उद्देश्य के लगातार स्क्रॉल करने से बचना चाहिए।
इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। सबसे पहले गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करें और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय तय करें। सोने से पहले फोन को अपने से दूर रखना और रात के समय अनावश्यक अलर्ट बंद करना भी फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बीच नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना चाहिए। पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधियों को भी रोजमर्रा की दिनचर्या में प्राथमिकता देनी चाहिए।
डिजिटल संतुलन के लिए परिवार और दोस्तों के साथ आमने-सामने समय बिताना, किताबें पढ़ना, थोड़ा टहलना और प्रकृति के बीच वक्त गुजारना भी उपयोगी है। इन गतिविधियों से स्क्रीन पर निर्भरता कम करने और दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। लगातार स्क्रीन पर बने रहने से नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए फोन के इस्तेमाल और दूसरे जरूरी कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
आखिरकार स्मार्टफोन और तकनीक अपने आप में समस्या नहीं हैं, बल्कि उनका जरूरत से ज्यादा और बिना उद्देश्य इस्तेमाल परेशानी पैदा कर सकता है। जरूरी है कि व्यक्ति अपनी जरूरत और प्राथमिकताओं के आधार पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करे। एल्गोरिदम और नोटिफिकेशन के अनुसार अपना समय बिताने के बजाय खुद तय करें कि फोन कब, कितनी देर और किस उद्देश्य से इस्तेमाल करना है। यही आदत डिजिटल दुनिया में संतुलित जीवन जीने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
