सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई इस सिफारिश को मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है। ऐसे में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मुकदमों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।
पांच न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल
कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा कोटे से पांच वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है। इनमें रेणुका कंचन कृष्णमूर्ति मिश्रा वीरेंद्र सिंह राजपूत ममता जैन और अशिता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। ये सभी न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और अब इनके नामों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बार कोटे से सात वकीलों की सिफारिश
वकीलों के कोटे से जिन सात नामों की सिफारिश की गई है उनमें डॉ. विवेक शरण राजेश कुमार शुक्ला कनकलता सिंह भक्ति व्यास श्रेयस पंडित मृणाल केलकर और अविनाश जरगर शामिल हैं। इन नामों को कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया के अगले चरण में भेजा जाएगा। इस तरह न्यायिक सेवा और बार दोनों वर्गों से नए न्यायाधीशों के चयन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।
इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।
नई नियुक्तियों का असर केवल जबलपुर की मुख्य पीठ तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि लंबित मुकदमों की संख्या कम होने और सुनवाई की गति बढ़ने का वास्तविक असर नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब सभी की नजर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया पर टिकी है।
