नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन ने ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम की तैयारी तेज कर दी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर चर्चा की गई। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।
कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग के तहत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित 10 राजाजी मार्ग पर ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। यह स्थान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आवास है। कार्यक्रम के जरिए विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने आरोपों को सामने रखने की तैयारी कर रहा है। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। बैठक को इस रैली से पहले विपक्षी दलों की रणनीति तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने प्रस्तावित कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए इसके सफल होने की उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, इसमें सांसदों, राजनीतिक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और उन मतदाताओं की भागीदारी हो सकती है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित लोग अपने विचार रखेंगे और यह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का माध्यम बनेगा।
दिल्ली के व्यापारियों की ओर से गठबंधन की रैली को लेकर जताई जा रही चिंता पर भी महुआ माजी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें कार्यक्रम को लोकतंत्र की रक्षा और लोगों की आवाज उठाने के उद्देश्य से आयोजित बताया गया है। महुआ माजी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग स्वीकार कर लेती है, तो उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। यह उनकी ओर से दिया गया राजनीतिक बयान है।
बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ गौरव गोगोई ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गौरव गोगोई ने भाजपा पर कथित अनियमितताओं से जुड़ी सच्चाई सामने आने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के सामने यह मुद्दा रखना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां किस तरह हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना का उल्लंघन करने और चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं। फिलहाल, 30 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर राजनीतिक गतिविधियां केंद्रित हैं। इन आयोजनों के जरिए विपक्ष एसआईआर, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
