सिम बाइंडिंग का उद्देश्य मोबाइल नंबर और उससे जुड़ी सेवाओं के बीच संबंध को मजबूत करना बताया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत जिस नंबर से WhatsApp या Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल किए जाते हैं, उससे संबंधित सिम की मौजूदगी को महत्व दिया जाएगा। जिन लोगों के फोन में WhatsApp चलाने वाले नंबर का सिम पहले से मौजूद है, उनके लिए बताई गई व्यवस्था के अनुसार अलग से बदलाव करने की आवश्यकता नहीं हो सकती। लेकिन सिम और WhatsApp अलग-अलग फोन में इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपने विकल्प समझने होंगे।
ऐसे उपयोगकर्ताओं के लिए पहला विकल्प WhatsApp अकाउंट को उस मोबाइल नंबर पर स्थानांतरित करना है, जिसका सिम उनके मौजूदा फोन में लगा हुआ है। इसके लिए ऐप में उपलब्ध चेंज नंबर सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। WhatsApp की सेटिंग में जाकर अकाउंट विकल्प के अंतर्गत चेंज नंबर सुविधा चुननी होती है। इसके बाद पुराने नंबर और नए नंबर की जानकारी दर्ज करके प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। नंबर बदलने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नए नंबर पर संदेश या सत्यापन कोड प्राप्त किया जा सकता हो।
इस प्रक्रिया के माध्यम से अकाउंट नए नंबर से जुड़ जाता है। इससे उपयोगकर्ता को पुराने नंबर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं रहती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अकाउंट बदलने पर चैट और संपर्कों को बनाए रखने की सुविधा मिल सकती है, लेकिन प्रक्रिया शुरू करने से पहले चैट का बैकअप लेना और ऐप के मौजूदा निर्देशों को ध्यान से पढ़ना बेहतर होगा। जिन लोगों के लिए पुराना नंबर महत्वपूर्ण है, उन्हें यह विकल्प अपनाने से पहले संभावित प्रभाव समझ लेना चाहिए।
दूसरा विकल्प ई-सिम का इस्तेमाल करना है। जिन स्मार्टफोन में ई-सिम की सुविधा उपलब्ध है, उनमें भौतिक सिम को डिजिटल सिम के रूप में सक्रिय कराया जा सकता है। इसके लिए संबंधित दूरसंचार ऑपरेटर की सुविधा के अनुसार आवेदन करना पड़ सकता है। ऑपरेटर के ऐप, ग्राहक सेवा या अधिकृत स्टोर से इस प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है। ई-सिम सक्रिय होने पर एक ही फोन में भौतिक सिम और डिजिटल सिम का इस्तेमाल संभव हो सकता है, बशर्ते डिवाइस और ऑपरेटर दोनों इसकी अनुमति दें।
तीसरा विकल्प WhatsApp का लिंक्ड डिवाइसेज फीचर है। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को अपने मुख्य अकाउंट से दूसरे डिवाइस को जोड़ने की अनुमति देती है। इसके लिए दूसरे फोन पर WhatsApp स्थापित करके लिंक किए गए मौजूदा अकाउंट का विकल्प चुनना होता है। इसके बाद मुख्य डिवाइस पर उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन करके दूसरे फोन को अकाउंट से जोड़ा जा सकता है। इस सुविधा का इस्तेमाल करते समय आधिकारिक निर्देशों का पालन करना जरूरी है। साथ ही, लिंक्ड डिवाइसेज की सुविधा अपने आप किसी नए सरकारी नियम के अनुपालन की गारंटी नहीं देती।
इसलिए उपयोगकर्ताओं को घबराकर अपना नंबर बदलने या सिम की व्यवस्था में तुरंत बदलाव करने के बजाय पहले नियम की आधिकारिक पुष्टि करनी चाहिए। WhatsApp और दूरसंचार विभाग की ओर से जारी निर्देशों के आधार पर ही तय करना उचित होगा कि किस डिवाइस पर सिम रखना आवश्यक है और लिंक्ड डिवाइसेज का इस्तेमाल किन शर्तों के तहत किया जा सकता है।
