दिव्या दत्ता पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं। बचपन में उनके माता पिता दोनों सरकारी डॉक्टर थे और उनके घर मरीजों का आना जाना लगा रहता था। लोगों के अलग अलग बोलने के अंदाज को सुनते सुनते दिव्या ने कई तरह की भाषा सीख ली थी। उनके पिता को लगा कि बच्ची को कुछ समय दिल्ली में अपनी बुआओं के साथ रहना चाहिए। इसके बाद दिव्या दिल्ली में अपनी तीन बुआओं के पास रहने लगीं। उनकी बुआएं शिक्षिका थीं और उन्होंने दिव्या की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व को भी निखारा।
दिव्या के भीतर फिल्मों का शौक उनकी सबसे छोटी बुआ ने जगाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था और दिव्या भी उनके साथ फिल्में देखने लगीं। धीरे धीरे फिल्मों की दुनिया उन्हें आकर्षित करने लगी। वह स्कूल जाने के लिए भी अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों जैसा हेयरस्टाइल बनवाना चाहती थीं। कभी वह नीतू कपूर की तरह दिखना चाहतीं तो कभी जीनत अमान और हेमा मालिनी से प्रभावित होतीं। इसी दौर में उनके भीतर अभिनेत्री बनने का सपना आकार लेने लगा।
लेकिन दिव्या की जिंदगी में सात साल की उम्र में बड़ा बदलाव आया। उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस घटना ने बेहद कम उम्र में उन्हें जिम्मेदार बना दिया। इसके बाद उनकी मां डॉ नलिनी दत्ता ने दिव्या और उनके भाई की परवरिश अकेले की। दिव्या अपनी मां के बेहद करीब थीं और उनके साथ रहते हुए उन्होंने अभिनय की कई बारीकियां अनजाने में सीख लीं।
दिव्या बताती हैं कि उनकी मां को पुरानी अभिनेत्रियां पसंद थीं और वह अक्सर उनके अंदाज में एक्सप्रेशन देती थीं। दिव्या भी मां की नकल किया करती थीं। दोनों साथ में गाने सुनते और छत पर डांस करते थे। मां के हाव भाव और अभिनय की शैली को देखते देखते दिव्या के भीतर अभिनय की समझ विकसित होती गई। आगे चलकर फिल्म ट्रेन टू पाकिस्तान में काम करते समय मां से सीखी ये बातें उनके काफी काम आईं।
मुंबई पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है। दिव्या को फिल्मी मैगजीन पढ़ने का शौक था। एक दिन उन्होंने स्टारडस्ट में छपे टैलेंट हंट का फॉर्म भर दिया लेकिन बाद में इसे भूल गईं। जब उनका फॉर्म स्वीकार हो गया तो उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं और मुंबई जाना चाहती हैं। परिवार में कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया लेकिन उनकी मां बेटी के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।
मुंबई आने के बाद दिव्या को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाई और कई यादगार किरदार निभाए। आज दिव्या दत्ता का नाम उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई है। उनके जन्मदिन पर उनकी यह कहानी बताती है कि एक छोटे शहर से शुरू हुआ सपना परिवार के भरोसे और लगातार संघर्ष के दम पर मायानगरी तक पहुंच सकता है।
