शुक्रवार व्रत की शुरुआत करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके अपने आराध्य का ध्यान किया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा के दौरान अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं। सामान्य रूप से पूजा में देवी देवता को उनके प्रिय माने जाने वाले फूल फल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। व्रत की कथा और आरती का भी विशेष महत्व माना जाता है।
अगर शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखा जा रहा है तो प्रचलित मान्यता के अनुसार गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। संतोषी माता के शुक्रवार व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने की परंपरा है। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार उपवास रख सकते हैं और कई परंपराओं में एक समय सात्विक भोजन करने का विधान बताया गया है। कुछ लोग केवल फल दूध या अन्य व्रत सामग्री का सेवन करते हैं।
माता लक्ष्मी की पूजा करने वाले श्रद्धालु शुक्रवार को घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार साफ और व्यवस्थित घर में लक्ष्मी का वास माना जाता है। पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को फूल फल और मिठाई अर्पित की जाती है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। कुछ मान्यताओं में सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना और सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है।
व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रोध ईर्ष्या चुगली और निंदा से बचना चाहिए। व्रत के दौरान भगवान का ध्यान मंत्र जाप भजन या धार्मिक पाठ करने की परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी व्रत से जुड़े धार्मिक आचरण का हिस्सा माना जाता है।
शुक्रवार व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति किस देवी देवता के लिए व्रत कर रहा है। संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से बचने की मान्यता प्रमुख है। वहीं सामान्य उपवास में फल दूध दही और सात्विक भोजन का सेवन करने की परंपरा कई परिवारों में है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत रखने का तरीका तय करना भी जरूरी है और अस्वस्थ व्यक्ति को कठोर उपवास करने से बचना चाहिए।
व्रत पूरा होने के बाद पारण भी नियमपूर्वक करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इस तरह शुक्रवार का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूजा पाठ संयम दान और सकारात्मक आचरण से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।
