नई दिल्ली ।भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लगातार बड़े स्तर पर विस्तार कर रहा है। वर्तमान में यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को एक साथ आगे बढ़ाने का उदाहरण पेश किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख सफलताओं में शामिल है। UPI के विस्तार ने बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है। इसके बावजूद डिजिटल लेनदेन की वृद्धि मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट में वैश्विक भुगतान उद्योग को लेकर भी अनुमान सामने रखा गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2030 तक वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि आने वाले वर्षों में इसकी वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों की तुलना में कुछ धीमी रहने का अनुमान है। पिछले पांच वर्षों में यह वृद्धि करीब 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही, जबकि आगे लगभग 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है।
भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर उपयोग के बीच संतुलन बनाने वाले उदाहरण के तौर पर बताया गया है। UPI के जरिए करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़े जाने के साथ लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डिजिटल भुगतान के साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। खास तौर पर ऑनलाइन भुगतान के क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड उपयोग में तेजी देखी जा रही है। इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई मूल्यवर्धित सेवाएं विकसित करने के अवसर बन रहे हैं।
डिजिटल भुगतान क्षेत्र का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एजेंटिक कॉमर्स से जुड़ा हुआ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में एआई आधारित सिस्टम भुगतान प्रक्रिया को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने में मदद कर सकते हैं।
एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर भुगतान और ट्रांजैक्शन बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। इससे कंपनियों को परिचालन लागत कम करने, उत्पादों में सुधार करने और पारंपरिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में मदद मिल सकती है। ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी कागजी प्रक्रियाओं में भी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
एजेंटिक कॉमर्स को लेकर बड़े व्यापारियों के रुख से भी इसकी बढ़ती अहमियत का संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने कहा कि बेहतर एजेंट-आधारित लेनदेन की सुविधा और समर्थन मिलने पर वे अपने भुगतान सेवा प्रदाता को बदलने पर विचार कर सकते हैं। इससे भुगतान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में एजेंटिक कॉमर्स की भूमिका बढ़ने के संकेत मिलते हैं।
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भुगतान संप्रभुता के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, दुनिया के 137 देशों में फिलहाल चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं। इससे वैश्विक भुगतान व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यापक हो रही है।
भारत का UPI इसी बदलते वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क के रूप में सामने आया है। हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग इसके विस्तार और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।
