वाशिंगटन। एशिया में पारंपरिक रूप से आर्थराइटिस के उपचार में इस्तेमाल किए जाने वाले एक औषधीय पौधे में ऐसा यौगिक पाया गया है, जो एचआईवी के खिलाफ प्रभावी हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पौधे से प्राप्त यौगिक पेटेंटीफ्लोरीन ए प्रयोगशाला परीक्षणों में एचआईवी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली दवा एजिडोथिमाइडीन (एजेडटी) की तुलना में अधिक शक्तिशाली पाया गया है।
यह यौगिक औषधीय पौधे जस्टीसिया से प्राप्त हुआ है। शोधकर्ताओं ने 4,500 से अधिक पौधों के अर्क का एचआईवी वायरस के खिलाफ प्रभाव का विश्लेषण किया, जिसमें पेटेंटीफ्लोरीन ए की पहचान हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह यौगिक एचआईवी/एड्स की रोकथाम और उपचार के लिए भविष्य में संभावित उपयोगी साबित हो सकता है।
अमेरिका के शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय के प्रोफेसर डोएल सोएजार्टो ने इस पौधे पर काम किया था। उन्होंने एक दशक से अधिक समय पहले वियतनाम के हनोई स्थित कुक फुओंग नेशनल पार्क से पौधे की पत्तियों, तनों और जड़ों के नमूने लेकर उनका अर्क तैयार किया था।
शोध के दौरान इन पौधों से प्राप्त अर्क की एचआईवी वायरस के विरुद्ध गतिविधि की जांच की गई। इसी प्रक्रिया में पेटेंटीफ्लोरीन ए को प्रभावशाली एचआईवी रोधी यौगिक के रूप में पहचाना गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस खोज से एचआईवी के खिलाफ नए उपचार विकल्प विकसित करने की दिशा में आगे शोध की संभावना बनती है। हालांकि, पौधे के इस यौगिक के चिकित्सकीय इस्तेमाल से पहले इसके प्रभाव, सुरक्षा और मानव शरीर पर असर को लेकर आगे व्यापक शोध और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होंगे।
