सालवार आंकड़ों में 2023-24 सबसे ज्यादा मौतों वाला वर्ष रहा। इस दौरान 16 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि 2022-23 में यह संख्या छह थी। 2024-25 में भी 13 छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई।
IIT हैदराबाद में सबसे ज्यादा मौतें
संस्थानवार आंकड़ों में IIT हैदराबाद में पांच साल के दौरान सबसे ज्यादा सात छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई। इसके बाद IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और IIT कानपुर में छह-छह छात्रों ने जान गंवाई।
वहीं IIT मद्रास में पांच और IIT (BHU) वाराणसी में चार छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई। बाकी IIT में दर्ज मामलों की संख्या इससे कम रही।
OBC के 12, SC के 9 और ST के 7 छात्र
सरकारी आंकड़ों में सामाजिक वर्ग के आधार पर भी मौतों का विवरण दिया गया है। पांच साल में आत्महत्या करने वाले 45 छात्रों में 12 OBC, 9 SC और 7 ST वर्ग से थे। इसके अलावा 16 छात्र सामान्य वर्ग से थे, जबकि एक छात्र EWS वर्ग से था।
केवल 2024-25 के आंकड़ों को देखें तो उस वर्ष आत्महत्या करने वाले 13 छात्रों में चार OBC, तीन ST और दो SC वर्ग से थे। वहीं चार छात्र सामान्य वर्ग के थे।
इस तरह 2024-25 में भी SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की संख्या कुल आत्महत्या के मामलों में उल्लेखनीय रही।
45 आत्महत्याओं के अलावा 8 अस्वाभाविक मौतें
सरकारी आंकड़ों में पांच साल की अवधि में आत्महत्या के 45 मामलों के अलावा आठ अन्य मौतों का भी उल्लेख है। इन्हें अस्वाभाविक मौत की श्रेणी में रखा गया है और आत्महत्या के 45 मामलों में शामिल नहीं किया गया है।
हालांकि, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों में इन छात्रों के कोर्स, अध्ययन के वर्ष या मौत के पीछे संभावित कारणों की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए केवल संख्या और सामाजिक वर्ग के आंकड़ों के आधार पर आत्महत्या के कारणों के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
यह जानकारी 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उपलब्ध कराए गए सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। आंकड़े 2020-21 से 2024-25 तक देश के सभी 23 IIT से संबंधित हैं।
