ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साई गिरिधर के अनुसार, जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की वृद्धि दर करीब चार गुना तक बढ़ी है। उनके मुताबिक, वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ना यानी अफोर्डेबिलिटी मौजूदा समय में मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है।
उनका कहना है कि जीएसटी में बदलाव के बाद छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों की ऑन-रोड लागत में स्थायी कमी आई। इन वाहन श्रेणियों पर बड़ी संख्या में उपभोक्ता निर्भर हैं। कीमतों में कमी का असर सिर्फ पहले से तय खरीद को आगे लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बाजार में नए ग्राहकों की भागीदारी भी बढ़ी।
साई गिरिधर के मुताबिक, इस बदलाव के बाद पहली बार वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के साथ लंबे समय से खरीद टाल रहे ग्राहक भी दोबारा शोरूम पहुंचने लगे। इससे ऑटो बाजार में मांग का दायरा बढ़ा है और कई श्रेणियों में बिक्री के मजबूत आंकड़े सामने आए हैं।
उन्होंने पिछले त्योहारी सीजन में दिखाई दी मजबूत मांग को भी इसी बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि यह तेजी केवल मौसमी गतिविधि नहीं रही। उनके अनुसार, मांग में आया बदलाव अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
ऑटो क्षेत्र में जीएसटी 2.0 के असर को उन्होंने मौसमी के बजाय संरचनात्मक बताया। इसी वजह से बीते एक साल में उद्योग की अलग-अलग वाहन श्रेणियों ने अपने मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इससे बाजार में उपभोक्ता मांग के विस्तार के संकेत मिले हैं।
दोपहिया वाहनों को व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है। गिरिधर ने बताया कि इस श्रेणी ने 2018 के बाद का अपना सर्वोच्च स्तर फिर हासिल किया है। इससे बड़े उपभोक्ता वर्ग के बीच वाहन खरीदने की क्षमता और रुचि में सुधार का संकेत मिलता है।
यात्री वाहन बाजार में भी बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा कई वाहन श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेज रही।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को भी ऑटो क्षेत्र में बढ़ती खपत से जोड़ा और कहा कि किफायती वाहन उपलब्ध कराने पर जोर देने से मांग और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है। हालांकि, उद्योग के सामने चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।
वाहन निर्माता कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उद्योग के लिए बढ़ी हुई मांग को बनाए रखना कीमतों और लागत के संतुलन पर भी निर्भर करेगा।
पिछले एक साल के अनुभव को लेकर उद्योग का कहना है कि वाहन बाजार में मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे प्रभावी कारकों में से एक साबित हुई है। जीएसटी 2.0 के बाद बढ़ी खरीद क्षमता ने ऑटो रिटेल को नई गति दी है।
