लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए इनके निपटारे की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार बनी रहने पर सभी लंबित अपीलों के निपटारे में लंबा समय लगने का अनुमान सामने आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल में इन अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाकर 42 किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की सुनवाई को तेज करना और बड़ी संख्या में जमा अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है।
लंबित अपीलों में बड़ी संख्या उन मामलों की है, जिनमें SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 22 लाख से अधिक अपीलें ऐसे मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई हैं, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके अलावा करीब 16 लाख अपीलें ऐसी हैं, जिनमें SIR के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है।
आंकड़ों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची करीब 38 लाख अपीलों में 57 प्रतिशत से अधिक मामले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची में नाम हटने से संबंधित विवादों से जुड़ा हुआ है।
ट्रिब्यूनल की संख्या 42 करने के प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख आधार राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी है। पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा क्षेत्र हैं। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के अनुरूप एक ट्रिब्यूनल होने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।
SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर दाखिल हुई अपीलों का निपटारा चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण सुनवाई की प्रक्रिया पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रिब्यूनल गठित करने का प्रस्ताव लंबित अपीलों के बोझ को कम करने और सुनवाई की गति बढ़ाने से जुड़ा है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही SIR संबंधी कार्यवाही के संदर्भ में सामने आया है। लंबित अपीलों की संख्या, मौजूदा ट्रिब्यूनलों की क्षमता और मामलों के निपटारे की गति को देखते हुए संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष प्रस्ताव पर होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
