Apple Pay की सबसे खास बात इसका Tap to Pay अनुभव है। इसमें यूजर को हर बार कोई अलग पेमेंट ऐप खोलने या QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होगी। समर्थित कार्ड को iPhone के Apple Wallet में जोड़ा जा सकेगा और भुगतान के समय iPhone को कॉन्टैक्टलेस पेमेंट स्वीकार करने वाली POS मशीन के पास टैप किया जा सकेगा। कार्ड की जानकारी डिवाइस में Tokenised Form में सुरक्षित रहती है जिससे वास्तविक कार्ड नंबर को सीधे साझा किए बिना भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
भारत में Apple Pay की शुरुआत अगर रिपोर्ट्स के मुताबिक होती है तो शुरुआती दौर में Axis Bank इसके प्रमुख बैंकिंग पार्टनर के तौर पर सामने आ सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि Apple की HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकों के साथ बातचीत चल रही है लेकिन इन बैंकों के साथ व्यावसायिक शर्तों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। Apple आगे चलकर अलग अलग बैंकों के साथ समझौते करके Apple Pay का दायरा बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट्स में Visa और Mastercard जैसे कार्ड नेटवर्क के साथ भी Apple की बातचीत का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब यह हो सकता है कि शुरुआती सेवा कार्ड आधारित Tap to Pay भुगतान पर ज्यादा केंद्रित रहे। हालांकि कौन से कार्ड और कौन से बैंक शुरुआत में पूरी तरह समर्थित होंगे इसकी अंतिम जानकारी आधिकारिक लॉन्च के समय ही स्पष्ट होगी।
भारत में Apple Pay के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले से मौजूद मजबूत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम है। देश में UPI के जरिए QR कोड मोबाइल नंबर और दूसरे तरीकों से भुगतान काफी तेजी से किया जाता है। Reuters के अनुसार भारत में डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम का करीब 84 प्रतिशत हिस्सा UPI से आता है। ऐसे बाजार में Apple Pay का प्रवेश कंपनी के लिए एक अलग तरह का कार्ड आधारित भुगतान अनुभव उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में NFC आधारित Tap to Pay का इस्तेमाल केवल Apple Pay तक सीमित नहीं रहेगा। NPCI ने UPI के लिए भी Tap and Pay सुविधा शुरू की है जिसके जरिए यूजर POS टर्मिनल पर स्मार्टफोन टैप करके भुगतान कर सकता है। ऐसे में Apple Pay की संभावित एंट्री भारत में कॉन्टैक्टलेस पेमेंट के विकल्पों को और बढ़ा सकती है।
कुल मिलाकर Apple Pay की भारत में संभावित एंट्री iPhone यूजर्स के लिए भुगतान का एक नया विकल्प लेकर आ सकती है। अगर सेवा रिपोर्ट्स के अनुसार अक्टूबर में शुरू होती है तो शुरुआत सीमित बैंक सपोर्ट के साथ हो सकती है और बाद में दूसरे बैंक जोड़े जा सकते हैं। फिलहाल यूजर्स को Apple की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
