वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साउथ वेस्ट यानी दक्षिण पश्चिम दिशा में बना मुख्य द्वार सबसे अधिक नकारात्मक माना जाता है। इस दिशा को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां मुख्य द्वार होने से घर में रहने वाले लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इसे आर्थिक समस्याओं और दुर्घटनाओं से भी जोड़ा गया है। वास्तु के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा में बने मुख्य द्वार को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
दक्षिण पूर्व यानी साउथ ईस्ट दिशा को भी मुख्य द्वार के लिए नकारात्मक दिशाओं में शामिल किया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर घर में आर्थिक परेशानियां और अचानक आने वाली समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पहले भी वास्तु से जुड़ी रिपोर्टों में दक्षिण पूर्व दिशा के मुख्य द्वार को घर में सामान के खोने या चोरी जैसी घटनाओं से जोड़ा गया है। साथ ही पैसों की आवक प्रभावित होने की बात भी कही गई है।
उत्तर पूर्व यानी नॉर्थ ईस्ट दिशा को लेकर भी कुछ विशेष मान्यताएं बताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर आर्थिक परेशानी के साथ अग्नि से जुड़ी समस्याओं की आशंका बताई जाती है। वास्तु के अनुसार व्यक्ति के गलत फैसलों के कारण धन का नुकसान होने की बात भी कही गई है। वहीं उत्तर पश्चिम यानी नॉर्थ वेस्ट दिशा के मुख्य द्वार को लेकर मान्यता है कि इससे व्यक्ति के विरोधियों की संख्या बढ़ सकती है और सहयोग करने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है।
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को लेकर दिशा के साथ उसकी स्थिति और आसपास के वातावरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए घर बनवाते समय केवल दरवाजे की खूबसूरती या सुविधा पर ध्यान देने के बजाय वास्तु मान्यताओं के अनुसार उसकी दिशा पर भी विचार करने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी भी घर में आर्थिक नुकसान या दुर्घटना जैसी वास्तविक समस्याओं का कारण केवल मुख्य द्वार की दिशा को मानना उचित नहीं है। ऐसी घटनाओं के पीछे कई व्यावहारिक और वास्तविक कारण हो सकते हैं।
कुल मिलाकर मुख्य द्वार को लेकर वास्तु में अलग अलग दिशाओं के अलग प्रभाव बताए गए हैं। इनमें दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व दिशा को विशेष रूप से नकारात्मक माना गया है। वहीं इन दावों को वास्तु संबंधी मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर।
