वाशिंगटन। अंतरिक्ष में इंसानों की पहुंच को नई ऊंचाई तक ले जाने के लक्ष्य के साथ स्पेसएक्स अपने सबसे महत्वाकांक्षी रॉकेट Starship की 14वीं टेस्ट उड़ान की तैयारी कर रहा है। एलन मस्क की कंपनी की यह उड़ान केवल एक और रॉकेट परीक्षण नहीं है, बल्कि भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्पेसएक्स की 14वीं टेस्ट फ्लाइट 22 सितंबर को लॉन्च किए जाने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए अभी कुछ सरकारी मंजूरियां मिलना बाकी हैं। मिशन सफल रहा तो कंपनी को Starship की क्षमता और उसके दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम को लेकर अहम तकनीकी जानकारी हासिल होगी।
पिछली उड़ान में मिले महत्वपूर्ण आंकड़े
स्पेसएक्स की जुलाई में हुई पिछली टेस्ट उड़ान के दौरान Starship अंतरिक्ष तक पहुंचा था और उसने 20 Starlink V3 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था। वापसी के दौरान Starship का ऊपरी हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होकर हिंद महासागर में उतरा। इस परीक्षण से इंजीनियरों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी आंकड़े मिले।
हालांकि, पिछली उड़ान पूरी कक्षा यानी ऑर्बिट पूरा नहीं कर सकी थी और लैंडिंग के दौरान सुपर हेवी बूस्टर भी नष्ट हो गया था। इसके बाद स्पेसएक्स ने अगली उड़ान के लिए कई तकनीकी बदलाव किए हैं।
करीब 10 घंटे का होगा मिशन
फ्लाइट-14 करीब 10 घंटे लंबी होने की योजना है। इस दौरान Starship पृथ्वी से लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए पृथ्वी के छह चक्कर लगाएगा और इसके बाद प्रशांत महासागर में उतरने का प्रयास करेगा। हालांकि, प्रस्तावित उड़ान की अंतिम तारीख और मिशन का संचालन संबंधित सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
Starlink से लेकर चांद तक कनेक्शन
Starship को सुपर हेवी बूस्टर और Starship स्पेसक्राफ्ट से मिलकर बना पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष परिवहन सिस्टम तैयार किया गया है। स्पेसएक्स का उद्देश्य इसके जरिए बड़े पैमाने पर सामान और भविष्य में इंसानों को अंतरिक्ष तक पहुंचाना तथा लॉन्चिंग की लागत को कम करना है।
Starship का महत्व स्पेसएक्स के Starlink इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार से भी जुड़ा है। कंपनी भविष्य में बड़े और अधिक क्षमता वाले V3 सैटेलाइट्स को तैनात करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में Starship इन सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नासा के आर्टेमिस मिशन में भी भूमिका
Starship का एक विशेष संस्करण नासा के Artemis कार्यक्रम के तहत चंद्र लैंडर के रूप में इस्तेमाल किया जाना प्रस्तावित है। नासा की योजना के अनुसार, 2027 में प्रस्तावित Artemis-3 मिशन में Starship के मून लैंडर संस्करण का इस्तेमाल किया जाना है।
इसके लिए Starship को पहले यह साबित करना होगा कि वह अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र कक्षा तक ले जाने, चांद की सतह पर उतरने और आवश्यक मिशन प्रक्रियाओं को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में सक्षम है।
असली लक्ष्य मंगल
मस्क लंबे समय से मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती स्थापित करने की महत्वाकांक्षा जाहिर करते रहे हैं। इसी दीर्घकालिक लक्ष्य के लिहाज से Starship को स्पेसएक्स की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक माना जाता है।
ऐसे में फ्लाइट-14 से मिलने वाले तकनीकी परिणाम भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम हो सकते हैं। हालांकि, चंद्र और मंगल मिशनों के लिए अभी कई तकनीकी चुनौतियों और परीक्षणों को पार करना बाकी है। इसीलिए 14वीं टेस्ट उड़ान Starship के विकासक्रम में एक महत्वपूर्ण परीक्षण के रूप में देखी जा रही है।
