यह कार्रवाई मजालता क्षेत्र में की गई। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रात के समय इलाके में तलाशी और अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों ने परिस्थितियों के बीच ऑपरेशन जारी रखा। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिसमें हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती आशंका है कि दोनों पाकिस्तान के नागरिक हो सकते हैं। इसके साथ ही उनके कश्मीर टाइगर्स या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी पहचान और किसी आतंकी संगठन से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों की पहचान तथा उनके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।
उधमपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। सुरक्षाबलों की ओर से अभियान के दौरान सामने आए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों आतंकी इलाके में कब पहुंचे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य सहयोगी या स्थानीय संपर्क भी मौजूद था।
इससे पहले 15 सितंबर को राजौरी में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीर पंजाल क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का खुलासा करते हुए जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।
जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 15 आतंकी घटनाओं की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं में 15 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा तीन नागरिकों की भी मौत हुई है। उधमपुर जिले में इस वर्ष सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। ताजा ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी और तलाशी गतिविधियां जारी रखी हैं।
