अब 17 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगा। 16 सितंबर को भारतीय बाजार बंद होने के बाद फेड का फैसला सामने आना था इसलिए इसका असर अगले कारोबारी सत्र में दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशक फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी पर भी नजर रखेंगे। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है जबकि नरम संकेत मिलने पर बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।
कच्चा तेल भी 17 सितंबर के कारोबार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। 16 सितंबर को Brent crude करीब 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर था। हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई और व्यापार घाटे से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में आगे की चाल का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। 15 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2978 करोड़ रुपए की निकासी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 2686 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे। लगातार विदेशी बिकवाली की स्थिति बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकती है।
तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23200 का स्तर चर्चा में रहेगा। 16 सितंबर को Nifty इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह 23116.10 के निचले स्तर तक गया था लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से 23284.75 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा। ऐसे में 17 सितंबर को बाजार में शुरुआती चाल के बाद निवेशकों की नजर यह देखने पर होगी कि Nifty अपनी बढ़त को बनाए रखता है या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है।
सेक्टोरल स्तर पर बैंक और FMCG शेयरों में बुधवार को मजबूती देखने को मिली जबकि IT और फार्मा शेयर दबाव में रहे। SBI HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों ने Nifty को सहारा दिया। 17 सितंबर को भी इन प्रमुख सेक्टरों की गतिविधियां बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
इसके अलावा 17 सितंबर से NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपए प्रति शेयर रखा गया है और यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। प्राथमिक बाजार में इस बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की सक्रियता का असर सेकेंडरी मार्केट की liquidity पर भी नजर आने वाला विषय रहेगा।
कुल मिलाकर 17 सितंबर को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान अमेरिकी फेड का फैसला कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की खरीदारी और Nifty के प्रमुख तकनीकी स्तर सबसे अहम संकेत रहेंगे। बाजार में तेजी के बाद भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेशकों के लिए किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले बाजार की चाल और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
