सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,217.60 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले दो दिनों की कमजोरी के बाद बाजार में रिकवरी दर्ज की।
हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख शेयरों में खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांकों में रहा। इसमें 1.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.44 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत चढ़ा। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार की रिकवरी को मजबूती दी।
इसके विपरीत निफ्टी आईटी पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, एसबीआई और आईटीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
बाजार के तकनीकी रुझान को लेकर विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 के स्तर को अहम बाधा बताया है। उनके मुताबिक व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी ओर 23,100 से 23,070 का स्तर तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 23,070 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में इन स्तरों पर बाजार की दिशा पर नजर रहेगी।
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपनाता है। फेड की टिप्पणी से वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेड की टिप्पणी संतुलित रहती है तो बाजार में आगे रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सख्त रुख, बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी या ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की स्थिति में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार की रिकवरी सीमित हो सकती है।
विश्लेषकों के मुताबिक अब निवेशकों का ध्यान फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगा। भविष्य की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक तरलता, पूंजी प्रवाह और वित्तीय बाजारों की निकट अवधि की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
