सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।
पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।
वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।
इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।
वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।
Keywords: EPFO, Pension, Insurance, Employees, Security
नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।
पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।
वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।
इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।
वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
