हाथियों के अचानक गांव के नजदीक पहुंचने की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने हाथियों को आबादी और खेतों से दूर करने का प्रयास किया। सूचना मिलने के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई।
हाथियों के झुंड को जंगल की ओर वापस भेजने के लिए ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर प्रयास किया। इस दौरान जोर-जोर से शोर किया गया और मिर्ची का तीखा धुआं किया गया। कई घंटे तक चले प्रयास के बाद हाथियों के झुंड को वापस जंगल की दिशा में मोड़ने में सफलता मिली।
हाथियों के उत्पात से परासी और महामन गांव के किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस घटना में किसान बृजभूषण सिंह के परासी स्थित खेत और रामनरेश सिंह के महामन स्थित खेत की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों के बड़े झुंड के अचानक खेतों में पहुंचने से लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। झुंड के वापस जंगल की ओर जाने के बाद भी ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है, क्योंकि हाथियों के दोबारा खेतों और आबादी वाले इलाकों की तरफ आने की आशंका बनी हुई है।
वन विभाग इस पूरे क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथियों को फिलहाल जंगल की ओर खदेड़ दिया गया है। इसके बाद भी उनकी आवाजाही पर निगरानी बनाए रखने के लिए वन अमला इलाके में लगातार गश्त कर रहा है।
हाथियों का यह झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में रहता है। जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की मौजूदगी के कारण आसपास के खेतों और रिहायशी क्षेत्रों में उनके पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसी वजह से वन विभाग की टीम झुंड की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है, ताकि हाथियों की दोबारा आबादी की ओर आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके।
घटना के बाद किसानों के सामने फसल नुकसान की भरपाई का सवाल भी खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराकर मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों की निगरानी में जुटी है और इलाके में गश्त जारी रखे हुए है।
