यह कार्रवाई DRI की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट के तहत की गई है। एजेंसी ऐसे मामलों पर नजर रख रही है जिनमें पाकिस्तान मूल के सामान को किसी तीसरे देश के जरिए भारत लाने की कथित कोशिश की जाती है। इसी अभियान के तहत महाराष्ट्र में एक मुंबई स्थित कंपनी की ओर से आयात किए गए 13 कंटेनरों को जांच के लिए रोका गया।
ये सभी कंटेनर नासिक के अंबड स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर पहुंचे थे। आयात दस्तावेजों में इनके भीतर मौजूद सूखे खजूर का मूल देश UAE बताया गया था। दस्तावेजों के आधार पर पहली नजर में यह खेप संयुक्त अरब अमीरात से भारत आई हुई लग रही थी। लेकिन DRI की जांच आगे बढ़ने पर माल की असली सप्लाई चेन को लेकर सवाल खड़े हुए।
एजेंसी की शुरुआती जांच के मुताबिक खजूर वास्तव में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से रवाना हुए थे। इसके बाद इन्हें UAE के जेबेल अली पोर्ट के रास्ते भारत भेजा गया। जांच में यह भी सामने आया कि जेबेल अली में कथित तौर पर कंटेनरों को बदला गया था। इसके बाद दूसरे जहाज के जरिए माल को भारत भेजे जाने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया ने DRI के सामने ट्रांसशिपमेंट के जरिए माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की आशंका को बढ़ा दिया।
DRI को संदेह है कि यह खेप ऐसे नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है जिसका संबंध पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ी संस्थाओं से है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि माल की बुकिंग से लेकर ट्रांसशिपमेंट और भारत में आयात तक पूरी प्रक्रिया में कौन कौन लोग या संस्थाएं शामिल थीं। साथ ही आयात दस्तावेजों में मूल देश के तौर पर UAE दर्ज किए जाने के पीछे की वजह की भी जांच की जा रही है।
दरअसल केंद्र सरकार ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। ऐसे में किसी तीसरे देश के जरिए पाकिस्तान मूल के सामान को भारत लाने की कोशिश सामने आने पर जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है।
DRI अब इस मामले में गलत घोषणा ट्रांसशिपमेंट और आयात दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। 362 टन से ज्यादा खजूर की यह खेप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सप्लाई चेन में कराची से UAE और फिर भारत तक का रास्ता सामने आया है। एजेंसी की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी और भारत में प्रतिबंधित सामान की कथित एंट्री कराने की कोशिश किस स्तर तक की गई थी।
