वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इनसाइड आउट पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर और भाजपा छोड़ने के फैसले को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब जब वह भाजपा में नहीं हैं तो अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। इसी दौरान उन्होंने पार्टी के काम करने के तरीके और कुछ राजनीतिक मुद्दों पर अपनी असहमति भी सामने रखी।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें भाजपा की ओर से कोई पैसा नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि भाजपा में अभी भी कुछ जवाबदेही दिखाई देती है। उन्होंने अपने तर्क के तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया।
पूनावाला ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक पंजाब और झारखंड में पेपर लीक से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में सामने आए ऐसे मामलों पर राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।
पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। पूनावाला ने मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ी बात कही। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना देश के अलग अलग दौर के नेताओं के संदर्भ में करते हुए अपनी राजनीतिक राय रखी। यह टिप्पणी उनके निजी राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई है।
राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी में बदलाव आया है और उन्होंने खुद में कुछ सुधार किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में निरंतरता की कमी होने की बात भी कही।
पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई मुद्दों पर लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। उन्होंने अपने और राहुल गांधी के बीच एक समानता का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कुछ आंदोलनों और उनके कथित फंडिंग से जुड़े दावों का जिक्र किया।
शहजाद पूनावाला का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा से उनके अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। जुलाई में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक कारणों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी के प्रवक्ताओं को वेतन नहीं मिलता है। अब पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान से साफ है कि भाजपा से अलग होने के बावजूद वह राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं।
