रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को देश के छह प्रमुख शहरों में आपातकालीन चेतावनी जारी की गई। इनमें मक्का, जिद्दा और ताइफ जैसे महत्वपूर्ण शहर भी शामिल रहे। सऊदी अरब के लिए यह स्थिति इसलिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि पहली बार मक्का तक संभावित हमले का खतरा पहुंचा और वहां भी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।
सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने अपने नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिद्दा, ताइफ, आभा, जाजान प्रांत, अल-उला और यान्बू सहित छह क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया। चेतावनी मिलते ही प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय घरों अथवा नजदीकी सुरक्षित स्थानों के भीतर रहने की अपील की। लोगों को खिड़की, दरवाजे, बालकनी और छत से दूर रहने तथा सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। प्रशासन ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।
दक्षिणी सऊदी में हमले, 13 नागरिक घायल
यह अलर्ट सोमवार को यमन की दिशा से हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जारी किया गया। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 14 सितंबर को हुए हमलों में आम नागरिकों और उनके रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया गया।
अल-मलिकी ने बताया कि मिसाइल और ड्रोन मुख्य रूप से खमीस मुशैत, आभा और ताइफ शहरों में पहुंचे। हमलों में 13 लोग घायल हुए, जबकि कम से कम सात आवासीय मकानों और दो निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा।
हूतियों ने सऊदी एयरबेस को निशाना बनाने का किया दावा
दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर काफी अंदर तक सैन्य कार्रवाई की। हूतियों के अनुसार, उनका मुख्य निशाना खमीस मुशैत में स्थित सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस था।
हूती प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यह हमला यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन से एयरबेस के लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया गया तथा वहां भारी नुकसान हुआ।
2022 के सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव
हूती हमलों के दावों के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देने की बात कही है। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में सक्षम है तथा भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से हुआ सीजफायर प्रभावी नहीं रह गया है। दोनों पक्षों के बीच शांति प्रयासों में ठहराव के बीच क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
तेल ढांचे पर भी मंडरा रहा खतरा
सऊदी अरब की चिंता केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं है। देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर भी हमलों का खतरा बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह एक हवाई हमले के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन का संचालन प्रभावित हुआ था। हालांकि, उस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार नहीं बताया गया, बल्कि इराक में सक्रिय ईरान समर्थित शिया गुटों पर संदेह जताया गया।
सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, छहों क्षेत्रों में जारी आपातकालीन चेतावनी बाद में हटा ली गई और खतरा टल गया। हालांकि, मक्का और जिद्दा जैसे महत्वपूर्ण शहरों तक सुरक्षा अलर्ट पहुंचना इस बात का संकेत है कि यमन से जुड़ा संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
