हालांकि, इस दावे को लेकर सबसे अहम बात यह है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिलने की बात नहीं कही गई है। 110 मिलियन टन अनुमानित कुल अयस्क संसाधन है, जिसमें यूरेनियम और रेयर अर्थ तत्वों की सांद्रता मौजूद होने का दावा किया गया है।
जबल सैयद में सर्वे से सामने आया अनुमान
‘अरब न्यूज’ के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने जबल सैयद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर करीब 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान बताया है। इसमें खास तौर पर हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की अधिक सांद्रता मिलने की बात कही गई है।
इसके साथ ही सर्वेक्षण में यूरेनियम की भी उत्साहजनक सांद्रता का संकेत मिला है। अब इन संसाधनों की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक उपयोगिता को निर्धारित करने के लिए आगे की जांच और मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।
मदीना की वजह से भी खास है यह खोज
मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। 622 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी, जिसके बाद यह शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र के आसपास रणनीतिक महत्व वाले खनिज संसाधनों की खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बना हुआ है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की चिंता का विषय रहा है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए बताता रहा है।
तेल से आगे अर्थव्यवस्था ले जाने की कोशिश
खनिज संसाधनों की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है।
इसी रणनीति के तहत देश में खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। सऊदी अरब घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की खोज और भविष्य में इनके इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।
यूरेनियम मिला तो सीधे परमाणु ईंधन नहीं बनेगा
मदीना क्षेत्र में यूरेनियम की संभावनाओं का दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच भी इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते हुए हैं।
यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है, लेकिन प्राकृतिक अयस्क मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उससे सीधे परमाणु ईंधन तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले खनन, प्रोसेसिंग और कन्वर्जन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जरूरत के मुताबिक इसके बाद संवर्धन यानी enrichment की प्रक्रिया भी होती है।
इसलिए फिलहाल मदीना में सामने आया दावा एक बड़े अयस्क संसाधन और उसमें मौजूद यूरेनियम की संभावित सांद्रता से जुड़ा है, न कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम भंडार से।
रेयर अर्थ की मौजूदगी भी बढ़ाती है रणनीतिक महत्व
इस खोज का दूसरा बड़ा पहलू रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था में इन खनिजों की अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और दूसरी हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाता है।
यदि आगे की जांच में जबल सैयद क्षेत्र के संसाधन व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं, तो इसका असर केवल सऊदी अरब की ऊर्जा रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की खनन क्षमता, औद्योगिक आधार और रणनीतिक खनिज आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल इन संसाधनों की वास्तविक क्षमता और आर्थिक उपयोगिता का आकलन आगे की भूवैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन यूरेनियम की संभावनाओं और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के दावे ने सऊदी अरब की बदलती ऊर्जा और खनिज रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
