नई दिल्ली । चांद को समझने की कोशिश अब एक नए दौर में पहुंच रही है। वैज्ञानिकों के पास दशकों से चंद्रमा की सतह और उसके वातावरण से जुड़ा विशाल डेटा मौजूद है लेकिन अलग अलग अंतरिक्ष मिशनों और उपकरणों से हासिल हुए इस डेटा को एक साथ समझना और उसका विश्लेषण करना आसान काम नहीं है। इसी चुनौती को कम करने के लिए NASA और IBM ने एक नया ओपन सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल पेश किया है। NASA-IBM Lunar Foundation Model नाम का यह मॉडल चांद की सतह से जुड़े अलग अलग प्रकार के डेटा को एक साथ समझने और उनका विश्लेषण करने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है।
इस मॉडल को 10 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया गया है। इसकी खासियत यह है कि इसे चांद से जुड़े व्यापक वैज्ञानिक डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। इसकी ट्रेनिंग में NASA के चार मिशनों के नौ अलग अलग उपकरणों से जुटाए गए डेटा की 30 से ज्यादा लेयर्स का इस्तेमाल किया गया है। इसमें Lunar Reconnaissance Orbiter यानी LRO से प्राप्त डेटा भी शामिल है। इसका मकसद वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह की विशेषताओं को ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से समझने में मदद करना है।
इस AI मॉडल का एक महत्वपूर्ण इस्तेमाल चांद पर मौजूद संभावित बर्फ की खोज में हो सकता है। वैज्ञानिक लंबे समय से चंद्रमा के उन इलाकों पर नजर रख रहे हैं जहां सूर्य की रोशनी स्थायी रूप से नहीं पहुंचती। ऐसे क्षेत्रों में पानी की बर्फ मौजूद होने की संभावना मानी जाती है। अगर इन संसाधनों की पहचान और मात्रा को बेहतर तरीके से समझा जा सके तो भविष्य में चांद पर लंबे समय तक मानव गतिविधियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पानी से पीने योग्य पानी के अलावा ऑक्सीजन और भविष्य में रॉकेट ईंधन जैसे संसाधनों की दिशा में भी संभावनाएं बन सकती हैं।
NASA-IBM का यह मॉडल केवल बर्फ खोजने तक सीमित नहीं है। यह चांद की सतह पर मौजूद क्रेटर्स की पहचान और उनकी मैपिंग में भी वैज्ञानिकों की सहायता कर सकता है। चंद्रमा पर हजारों छोटे बड़े क्रेटर मौजूद हैं और उनकी सही पहचान भविष्य के मिशनों के लिए काफी अहम हो सकती है। किसी संभावित लैंडिंग साइट का चयन करते समय सतह की बनावट और वहां मौजूद खतरनाक संरचनाओं को समझना जरूरी होता है। ऐसे में AI आधारित विश्लेषण सुरक्षित और उपयुक्त लैंडिंग क्षेत्रों की पहचान में मददगार हो सकता है।
इसके अलावा मॉडल का इस्तेमाल चांद की ज्वालामुखीय विशेषताओं और दूसरी भूगर्भीय संरचनाओं को समझने में भी किया जा सकता है। NASA और IBM के अनुसार बेंचमार्क टेस्ट में इस मॉडल ने चंद्र सतह की महत्वपूर्ण विशेषताओं की पहचान करने में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मॉडल की तुलना में 23 प्रतिशत बेहतर सटीकता दिखाई है।
यह तकनीक NASA के Artemis कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। 2028 में अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चांद पर भेजने की योजना के बीच चंद्र सतह की बेहतर जानकारी मिशन की तैयारी में अहम भूमिका निभा सकती है। भविष्य में चांद पर लंबे समय तक मानव मौजूदगी और मंगल मिशनों की तैयारी के लिए संसाधनों की पहचान जरूरी होगी। ऐसे में NASA-IBM Lunar Foundation Model चांद से जुड़े विशाल वैज्ञानिक डेटा को समझने का एक नया और तेज तरीका उपलब्ध करा सकता है।
