जानकारी के अनुसार ददूनी गांव श्योपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। रविवार की शाम एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। टंकी की ऊंचाई लगभग 60 फीट बताई जा रही है। सांड के इतनी ऊंचाई पर पहुंचने की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने लगे। लोगों ने अपने स्तर पर उसे नीचे लाने की कोशिश की लेकिन ऊंचाई और सांड की स्थिति को देखते हुए यह आसान नहीं था।
ददूनी पंचायत के सचिव महेश गौड़ के मुताबिक सांड पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पुलिस और प्रशासन को भी पूरे मामले की सूचना दे दी गई थी। इस दौरान सांड ने एक बार नीचे उतरने का प्रयास किया लेकिन नीचे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ देखकर वह फिर ऊपर की तरफ चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की ताकि जानवर को नीचे आने का मौका मिल सके लेकिन सांड टंकी पर ही रुका रहा।
समय बीतता गया और रविवार की शाम से मंगलवार तक करीब 42 घंटे गुजर गए। इस दौरान पंचायत की ओर से सांड के खाने और पानी की व्यवस्था की गई। प्रशासन और ग्रामीण उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रहे। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इतने भारी जानवर को 60 फीट की ऊंचाई से नीचे उतारते समय किसी तरह की चोट या दुर्घटना न हो। इसी वजह से जल्दबाजी के बजाय सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू की योजना बनाई गई।
मंगलवार को प्रशासन ने श्योपुर से क्रेन मंगवाई। मौके पर पुलिस के साथ पशुपालन विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मानपुर थाना प्रभारी सतीश दुबे के अनुसार पुलिस टीम ने पशुपालन विभाग के सहयोग से अभियान चलाया। पशु चिकित्सा अधिकारी सचिन उपाध्याय ने सांड को नियंत्रित करने के लिए बेहोशी की दवा दी। इसके बाद क्रेन की मदद से उसे सावधानीपूर्वक नीचे उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई।
करीब दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में टीम ने बेहद सावधानी के साथ सांड को नीचे लाने का काम किया। आखिरकार 42 घंटे से टंकी पर फंसे सांड को सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। सांड के सुरक्षित नीचे आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और मौके पर बनी हलचल भी धीरे धीरे खत्म हो गई।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया कि आखिर सांड 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ा कैसे। फिलहाल इसका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है लेकिन इस अनोखे रेस्क्यू की चर्चा पूरे इलाके में बनी हुई है।
