अगर केवल कंपनियों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो निफ्टी का दायरा सेंसेक्स से बड़ा है। निफ्टी में 50 कंपनियां शामिल होने के कारण इसमें सेक्टरों की भागीदारी अपेक्षाकृत व्यापक मानी जाती है। सेंसेक्स में केवल 30 कंपनियां हैं लेकिन इनमें भी भारत की कई बड़ी और प्रभावशाली कंपनियां शामिल रहती हैं। यही कारण है कि दोनों इंडेक्स अक्सर एक जैसी दिशा में चलते दिखाई देते हैं। जब देश के बड़े बैंक आईटी कंपनियां ऊर्जा क्षेत्र या दूसरे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में तेजी या गिरावट आती है तो उसका असर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि किसी इंडेक्स का अंक अधिक होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह दूसरे इंडेक्स से बेहतर है। कई नए निवेशक सेंसेक्स के बड़े अंक को देखकर इसे निफ्टी से अधिक मजबूत या महंगा मान लेते हैं लेकिन यह सही तरीका नहीं है। दो इंडेक्स की तुलना हमेशा प्रतिशत के आधार पर की जानी चाहिए। सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट और निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट को सीधे तुलना नहीं किया जा सकता क्योंकि दोनों का स्तर अलग है। इसलिए बाजार की वास्तविक चाल समझने के लिए प्रतिशत बदलाव अधिक महत्वपूर्ण होता है।
अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए इंडेक्स फंड या ईटीएफ के जरिए निवेश करने पर विचार कर रहा है तो निफ्टी 50 को अक्सर व्यापक कवरेज के कारण देखा जाता है। निफ्टी 50 भारत की 50 प्रमुख कंपनियों और कई महत्वपूर्ण सेक्टरों को कवर करता है तथा यह फंड पोर्टफोलियो की तुलना और इंडेक्स आधारित निवेश के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सेंसेक्स उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी बेंचमार्क है जो भारत की चुनिंदा 30 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर बाजार की दिशा समझना चाहते हैं।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर निवेशक के लिए केवल निफ्टी ही बेहतर है या सेंसेक्स ही सबसे अच्छा विकल्प है। दोनों प्रमुख बाजार इंडेक्स हैं और लंबी अवधि में इनके प्रदर्शन की दिशा अक्सर काफी हद तक मिलती जुलती रही है। सही विकल्प निवेशक के लक्ष्य जोखिम लेने की क्षमता निवेश अवधि और चुने गए निवेश उत्पाद के खर्च जैसे कारकों पर निर्भर करता है। इंडेक्स फंड या ईटीएफ चुनते समय केवल निफ्टी या सेंसेक्स का नाम देखने के बजाय एक्सपेंस रेशियो ट्रैकिंग एरर और निवेश की अवधि पर भी ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर बाजार को व्यापक रूप से समझने और 50 बड़ी कंपनियों की भागीदारी देखने के लिए निफ्टी 50 को अधिक विस्तृत प्रतिनिधित्व वाला इंडेक्स माना जा सकता है जबकि सेंसेक्स 30 प्रमुख कंपनियों के जरिए बाजार की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है। दोनों में से कौन बेहतर है इसका जवाब हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है। निवेश का फैसला केवल इंडेक्स के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है इसलिए बिना समझे केवल तेजी के दौर को देखकर निवेश करने के बजाय पूरी जानकारी और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह के साथ कदम उठाना बेहतर है।
निफ्टी 50 में 50 कंपनियां और सेंसेक्स में 30 कंपनियां शामिल हैं तथा दोनों फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति का उपयोग करते हैं। निफ्टी का कवरेज अपेक्षाकृत व्यापक है लेकिन दोनों प्रमुख इंडेक्स भारत की बड़ी कंपनियों और बाजार की दिशा को दर्शाते हैं।
