रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर सात प्रतिशत से अधिक रह सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह पहले लगाए गए अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाएगा। मजबूत आर्थिक गतिविधियां और स्थिर मांग ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में बदलाव करने से बच सकता है।
एसबीआई रिसर्च ने बताया कि जुलाई के दौरान देश में लगभग 35 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप 24 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया। इसके साथ ही जून के अंत तक तीन महीने की अवधि वाले फॉरवर्ड पोजीशन में 13 अरब डॉलर की कमी आई जिससे विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव कम हुआ और रुपये की स्थिति को भी सहारा मिला।
हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि वैश्विक परिस्थितियां अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव पश्चिम एशिया की भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक पूंजी प्रवाह को लेकर बनी अनिश्चितता ऐसे कारक हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि आरबीआई फिलहाल अत्यधिक नरम रुख अपनाने के बजाय सतर्क रणनीति जारी रख सकता है।
आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक तीन से पांच अगस्त तक आयोजित होगी जबकि पांच अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। वित्तीय बाजार और उद्योग जगत इस बैठक से ब्याज दरों के साथ साथ महंगाई आर्थिक वृद्धि और भविष्य की मौद्रिक नीति के संकेतों पर भी नजर रखे हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी दबाव में है। कई देशों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी हुई है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान अपेक्षा से अधिक सुस्ती देखने को मिली। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है।
एसबीआई रिसर्च ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में मानसून की स्थिति में सुधार हुआ है। जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण देश में वर्षा की कमी घटकर केवल 13 प्रतिशत रह गई है। जलाशयों का जलस्तर लगभग सामान्य है और खरीफ फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली कम रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता मांग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में एआई को लेकर तेजी से बढ़ते निवेश और अत्यधिक उम्मीदों के कारण भविष्य में एआई बबल बनने का खतरा पैदा हो सकता है। कई कंपनियां आवश्यकता से अधिक निवेश कर रही हैं जो आगे चलकर जोखिम का कारण बन सकता है।
कुल मिलाकर एसबीआई रिसर्च का आकलन है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार बेहतर मानसून और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देगा।
