नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।
