वार्तालाप के दौरान सुदेश बेरी ने देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों की शैली पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने हाल के दिनों में चर्चा में आए एक संगठन और उनके विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जंतर-मंतर जैसी जगहों पर बैठकर प्रदर्शन करने से समाज का वास्तविक भला नहीं होता। अभिनेता का मानना है कि यदि कोई सच में जनसेवा करना चाहता है, तो उसे बच्चों के लिए खेल के मैदान, बुजुर्गों के लिए आश्रम और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे ठोस सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए अभिनेता ने उनके शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर विश्व पटल पर देश का प्रतिनिधित्व करना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए व्यक्त किया कि जिस तरह लोग बिना देखे ईश्वर पर विश्वास और उनका सम्मान करते हैं, ठीक उसी तरह वे भी प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा रखते हैं और अवसर मिलने पर उन्हें नमन करना चाहते हैं।
मनोरंजन जगत में अक्सर कलाकारों के राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर काफी बहस देखने को मिलती है। सुदेश बेरी के इस बयान ने भी सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज और विचार की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य लोग विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए उनके सुझावों को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं।
अभिनय क्षेत्र की बात करें तो सुदेश बेरी लंबे समय से भारतीय सिनेमा और टेलीविजन उद्योग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ‘बॉर्डर’ जैसी देशभक्ति पर आधारित ऐतिहासिक फिल्मों से लेकर कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है। हाल ही में वे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वल में एक संक्षिप्त भूमिका में नजर आए थे। फिलहाल उनके इस बयान के बाद बॉलीवुड के गलियारों में उनकी काफी चर्चा हो रही है।
