अब तक तत्काल टिकट के लिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर टोकन जारी किए जाते थे। कोई भी व्यक्ति लाइन में लगकर टोकन प्राप्त कर सकता था और यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह टिकट अपने लिए बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति के लिए। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई लोग बार बार लाइन में लगकर अलग अलग यात्रियों के लिए टिकट बुक कराने की कोशिश करते थे जिससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। रेलवे को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जिनमें दलालों की सक्रियता और वास्तविक यात्रियों को टिकट न मिलने की बात सामने आ रही थी।
नई व्यवस्था के तहत अब केवल लाइन में पहले पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। टोकन लेने वाले व्यक्ति को यह बताना होगा कि वह अपना टिकट बनवा रहा है अपने परिवार के किसी सदस्य का टिकट बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति का। इसके आधार पर यात्रियों को दो अलग अलग प्राथमिकता श्रेणियों में रखा जाएगा। प्राथमिकता ए में स्वयं और निकट परिवार के सदस्य शामिल होंगे जिनमें माता पिता पति पत्नी पुत्र पुत्री भाई बहन तथा दादा दादी आते हैं। इन सभी के टिकटों की बुकिंग पहले की जाएगी। इसके बाद प्राथमिकता बी के तहत अन्य व्यक्तियों के टिकट बनाए जाएंगे।
नई प्रणाली में पहचान और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य का टिकट बनवा रहा है तो उसे सरकारी दस्तावेज के माध्यम से संबंध का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। वहीं किसी अन्य व्यक्ति का टिकट बनवाने की स्थिति में संबंधित यात्री के पहचान पत्र की स्वयं सत्यापित प्रति और उसके हस्ताक्षर भी आवश्यक होंगे। रेलवे का कहना है कि इससे फर्जी बुकिंग और गलत जानकारी देकर टिकट लेने की संभावना काफी कम हो जाएगी।
टोकन वितरण की प्रक्रिया भी पहले से अधिक नियंत्रित रहेगी। एसी तत्काल टिकट के लिए सुबह साढ़े आठ बजे से नौ बजे तक प्रत्येक काउंटर पर अधिकतम दस टोकन जारी किए जाएंगे जबकि स्लीपर श्रेणी के लिए सुबह नौ बजे से साढ़े नौ बजे तक अधिकतम पंद्रह टोकन दिए जाएंगे। प्रत्येक टोकन पर संबंधित काउंटर का नंबर अंकित रहेगा और उसका पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसकी जांच की जा सके।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था में टोकन किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। जिस व्यक्ति के नाम पर टोकन जारी होगा वही टिकट बुक करा सकेगा। साथ ही बार बार टोकन लेने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा। इससे दलालों और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक सीमित होने की उम्मीद है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य वास्तविक यात्रियों और उनके परिवार को प्राथमिकता देना है ताकि टिकट वितरण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत आरक्षण केंद्रों से ही टिकट बनवाएं और किसी भी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिए के झांसे में आने से बचें। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद तत्काल टिकट बुकिंग पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
