वाशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। उनके अनुसार अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान की स्थिति नहीं बनी। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों और रक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तत्परता के कारण संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस तरह के हमलों को नजरअंदाज नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जिन समूहों ने हमला किया है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा और अमेरिका आवश्यक होने पर सैन्य कार्रवाई करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में बातचीत और समझौते की कोई संभावना बनती है तो उसके लिए भी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं। इस बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका एक ओर सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक विकल्पों को भी पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी बलों को क्षेत्र से हटाने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। उनके अनुसार मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और मौजूदा परिस्थितियों में उनकी तैनाती जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बयान के दौरान ट्रंप ने ईरान को संभावित हथियार आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी तीसरे देश के माध्यम से ईरान को बड़े पैमाने पर हथियार उपलब्ध कराए जाते हैं तो यह चिंताजनक होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस विषय पर उन्हें पहले सकारात्मक आश्वासन मिल चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाले कदम नहीं उठाए जाएंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि मौजूदा प्रतिबंधों के अलावा अतिरिक्त आर्थिक उपायों पर भी विचार किया जाए। उनका मानना है कि आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी रणनीति अपनाना आवश्यक हो सकता है।
इस दौरान ट्रंप ने यूक्रेन संकट का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी इच्छा युद्ध को समाप्त करने की है। उन्होंने दोनों पक्षों के साथ संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए उम्मीद जताई कि कूटनीतिक प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। हालांकि उनका मुख्य फोकस मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और अमेरिकी सुरक्षा हितों पर रहा।
हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसके सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी रह सकती है।
