पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु पीतांबर धारण करते हैं। उनका यह स्वरूप संसार के पालनकर्ता के रूप में शांति संतुलन और समृद्धि का संदेश देता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है तथा पीले रंग का प्रयोग करता है उसके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं।
ज्योतिष शास्त्र में भी गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति ग्रह से बताया गया है। बृहस्पति को ज्ञान धर्म शिक्षा संतान विवाह धन और सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। पीला रंग बृहस्पति का प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना पीली वस्तुओं का दान करना और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।
गुरुवार के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल चने की दाल हल्दी केसर और केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को पीले वस्त्र भोजन या पीली दाल का दान करते हैं। दान और सेवा को भी इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है।
पीले रंग का मनोवैज्ञानिक महत्व भी काफी खास माना जाता है। यह रंग आशा आत्मविश्वास उत्साह और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ यह व्यक्ति के मन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करने वाला रंग भी माना जाता है। यही वजह है कि गुरुवार को पीला रंग पहनना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है।
ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी भी पूजा या व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची श्रद्धा अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच होती है। पीले वस्त्र धारण करना और पूजा करना आस्था का विषय है। यदि व्यक्ति भगवान विष्णु की भक्ति के साथ सदाचार सेवा और ईमानदारी का मार्ग अपनाता है तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग स्वयं प्रशस्त होने लगता है।
