पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “बेहद दोस्ताना बातचीत” चल रही है और उन्हें समझौते की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका फिर वही कदम उठाएगा, जो कुछ दिन पहले सैन्य मोर्चे पर उठा रहा था।
चुनावी रैली में दिखाया सख्त रुख
मिशिगन में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रति और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान को “रिश्वत देकर नहीं, बल्कि हराकर” ही रोका जा सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना, वायुसेना, सैन्य नेतृत्व, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन-मिसाइल निर्माण क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की सराहना करते हुए दावा किया कि ईरान की समुद्री गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाया गया है।
क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ा
ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की घटनाओं की जानकारी दी है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका दिया है। हालांकि अमेरिका ने हाल ही में करीब दो सप्ताह से जारी ईरान के खिलाफ हवाई अभियान को फिलहाल रोक दिया था।
क्यों रोका गया हवाई अभियान?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य कमांडरों ने राष्ट्रपति को बताया था कि लगातार हवाई हमलों के बाद संभावित सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। साथ ही हमलों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और गोला-बारूद के भंडार को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि ट्रंप ने हथियारों की कमी की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना तेजी से अपने भंडार को फिर से मजबूत कर रही है और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर काम जारी है।
ईरान ने बातचीत की मांग से किया इनकार
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान ने अमेरिका से बातचीत की कोई औपचारिक पहल नहीं की है। उन्होंने ऐसी खबरों को निराधार बताया। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि घोषित युद्धविराम प्रभावी रहता है तो ईरान भी अपने हमले रोक सकता है।
सऊदी और हूती फिर आमने-सामने
सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। रियाद ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सऊदी सैन्य गतिविधियों का जवाब बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र
इस बीच ईरान ने अमेरिका पर अपने समुद्री क्षेत्र में जहाजों और तेल टैंकरों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। तेहरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बरकरार है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले छह जहाजों को सोमवार को वापस लौटा दिया गया।
