सरकार के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचा है। करीब 86 प्रतिशत लाभार्थी उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं। यह योजना सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।
असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां SVEP के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यम स्थापित किए गए हैं। इन राज्यों में स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
SVEP का संचालन स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से किया जाता है। इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, मेंटरिंग, वित्तीय सहायता तथा सामुदायिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य गांवों में आत्मनिर्भर उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
सरकार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ समन्वय कर SVEP का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने के लिए वित्त और मार्गदर्शन दोनों उपलब्ध हो रहे हैं।
योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक 942.09 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि योजना की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में जारी 112.39 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है, जो सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश 27,083 रुपए निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि सीमित निवेश के बावजूद यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय स्थापित करने में सफल रहा है।
SVEP की एक खास विशेषता इसका कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) मॉडल है। इन संसाधन व्यक्तियों का चयन प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद किया जाता है। इनमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है और कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुने जाते हैं। साथ ही इस कैडर में महिलाओं की न्यूनतम 60 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को प्रशिक्षण, व्यवसायिक मार्गदर्शन, बैंक ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करता है। सरकार का मानना है कि मजबूत सामुदायिक संस्थाओं और स्थानीय नेतृत्व के सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता न केवल गरीबी उन्मूलन का प्रभावी माध्यम बन रही है, बल्कि महिलाओं, युवाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
