बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी करीब 24 हजार के स्तर के आसपास फिसल गया। लगातार दूसरे दिन आई इस कमजोरी ने बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस स्थिति का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉरपोरेट लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब विदेशी निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है। रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताओं को बढ़ाया है।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो शुरुआती कारोबार में एविएशन और फार्मा क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों में मुनाफावसूली के कारण भी बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। एशियाई बाजारों में कुछ प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, जबकि कुछ अन्य बाजारों में कमजोरी बनी रही। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, ऊर्जा बाजार और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका असर आने वाले दिनों में भी बाजार की चाल तय कर सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और आगामी आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और संतुलित निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।
