डॉ. शुक्ल के सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस समारोह में उनके जीवन के विभिन्न आयामों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत होती है। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति डॉ. शुक्ल का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। प्रोफेसर उपाध्याय ने अपने संबोधन में डॉ. शुक्ल की साहित्यिक प्रतिभा, भाषा पर असाधारण पकड़, संपादन कौशल और शिक्षण शैली की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, अनुशासित व्यक्तित्व और संवेदनशील साहित्यकार बताया।
समारोह की अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने ज्ञान, अनुभव और सामाजिक दृष्टि से शिक्षा जगत को समृद्ध किया है। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना की।
कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित लगभग 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। उनके अभिन्न मित्र और सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी द्वारा तैयार इस वृत्तचित्र में भारतीय वायुसेना से लेकर उच्च शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के दौरान कई अतिथि भावुक भी नजर आए।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोज कुमार ‘मृदुल’ ने प्रभावी ढंग से किया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाया। लगभग 17 वर्ष 7 माह तक सैन्य सेवा देने के बाद उन्होंने शिक्षा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।
समारोह में भारतीय वायुसेना के उनके पूर्व साथी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और आकांक्षा दीक्षित ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रीतिभोज के साथ संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक विदाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी के सम्मान का उत्सव बन गया, जिसने अपने 46 वर्षों के सफर से समाज, शिक्षा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
