नई दिल्ली ।भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने तीन देशों के राजकीय दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा की राजधानी चिसीनाउ पहुंचकर वहां की राष्ट्रपति माइया सैंडू से शिखर वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और मोल्दोवा के द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।
चिसीनाउ स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मु का औपचारिक स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और दोनों देशों के राष्ट्रीय सम्मान के अनुरूप राजकीय समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति माइया सैंडू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और विश्वास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और मोल्दोवा के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों पर व्यापक चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मौजूदा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ नई साझेदारियों की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। वार्ता में आपसी हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा प्रयासों पर भी जोर दिया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा का यह पहला राजकीय दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच बढ़ते विश्वास, मित्रता और दीर्घकालिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और साझा विकास की भावना को भविष्य की साझेदारी का मजबूत आधार बताया।
इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु की मोल्दोवा की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके अलावा वह मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ संवाद करेंगी। यात्रा कार्यक्रम में व्यापारिक समुदाय के साथ बिजनेस फोरम को संबोधित करने और मोल्दोवा में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात भी शामिल है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।
भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत यूरोप के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है और मोल्दोवा के साथ यह संवाद उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अपने तीन देशों के दौरे के पहले चरण में मोल्दोवा पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई गति देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में इस दौरे के परिणाम व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद जताई जा रही है।
