कंपनी की ओर से जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में विप्रो का समेकित शुद्ध लाभ घटकर 3,352 करोड़ रुपये रहा। वहीं, कंपनी की कुल आय तिमाही आधार पर लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 24,480 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सालाना आधार पर आय में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मुनाफा लगभग स्थिर रहा।
परिचालन प्रदर्शन की बात करें तो आईटी सेवा कारोबार का ऑपरेटिंग मार्जिन 16 प्रतिशत रहा। यह पिछली तिमाही और पिछले वर्ष की समान अवधि दोनों की तुलना में कम रहा। मार्जिन में आई गिरावट को लागत और बाजार परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कंपनी ने नकदी प्रवाह के मोर्चे पर सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया है।
जून तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो बढ़कर 3,290 करोड़ रुपये हो गया। यह तिमाही की शुद्ध आय का लगभग 98 प्रतिशत रहा, जिसे कंपनी के लिए मजबूत नकदी स्थिति का संकेत माना जा रहा है। वहीं पिछले 12 महीनों के आधार पर स्वैच्छिक कर्मचारी त्याग दर 13.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जो आईटी उद्योग में मानव संसाधन की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।
विप्रो ने आगामी तिमाही के लिए भी अपना कारोबारी अनुमान जारी किया है। कंपनी का कहना है कि आईटी सेवा कारोबार की आय में अगली तिमाही के दौरान 1.5 प्रतिशत तक गिरावट या 0.5 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी फिलहाल सतर्क कारोबारी दृष्टिकोण अपनाए हुए है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए है।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक श्रीनी पल्लिया ने कहा कि वैश्विक ग्राहक अब केवल तकनीकी आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परिचालन मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं। उनके अनुसार, विप्रो अपनी कंसल्टिंग विशेषज्ञता और एआई आधारित समाधान के माध्यम से ग्राहकों को उनके कारोबारी बदलाव में सहयोग दे रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी की रणनीति ग्राहकों के व्यवसाय में एआई को प्रभावी ढंग से शामिल करने पर केंद्रित है।
तिमाही नतीजों के साथ कंपनी के निदेशक मंडल ने प्रति इक्विटी शेयर दो रुपये के अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की है। शेयर बाजार में परिणाम जारी होने के बाद कंपनी के शेयर में बढ़त देखने को मिली। हालांकि पिछले कुछ महीनों और एक वर्ष के दौरान शेयर के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है। अब निवेशकों की नजर कंपनी की आगामी तिमाहियों की रणनीति, वैश्विक आईटी मांग और एआई आधारित सेवाओं के विस्तार पर बनी रहेगी।
