समिति द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की सिफारिशें शामिल हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, परंपराओं और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में कुल दस अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनमें विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप से संबंधित है। समिति ने मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित प्रारूप में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप समान नागरिक संहिता का व्यावहारिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है।
तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए थे। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है। समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा भी की है।
राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव तैयार करने का दायित्व सौंपा था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, प्रचलित परंपराओं और सामाजिक विविधता के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न समुदायों की परंपरागत धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सहित अन्य सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब रिपोर्ट विधि विभाग के पास है, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति और मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने पर विचार कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों से भी स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे विषय पर सभी पक्षों को अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने चाहिए। सरकार का कहना है कि व्यापक जन-परामर्श और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार यह प्रतिवेदन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज के रूप में काम करेगा।
