दौसा जिले की सीमा में आने वाले एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 35 लोगों की जान गई। वहीं वर्ष 2026 में जून तक 24 हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह दो वर्षों से भी कम समय में इस मार्ग पर 61 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा और एक्सप्रेसवे के संचालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में इसी मार्ग पर हुई एक भीषण बस दुर्घटना ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि मार्ग पर दिशा-सूचक संकेत स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे चल रहे वाहन के चालक को सही निकास बिंदु समझने में परेशानी हुई। इसके बाद वाहन की गति अचानक कम होने से पीछे आ रही तेज रफ्तार बस उससे टकरा गई। इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।
प्रारंभिक स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में लगे दिशा-सूचक बोर्ड तेज गति से चल रहे वाहनों के चालकों के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं हैं। कई स्थानों पर टर्न से पहले लगाए गए संकेत छोटे दिखाई देते हैं, जिससे चालक समय रहते सही लेन नहीं चुन पाते। कुछ मामलों में वाहन आगे निकलने के बाद अचानक गति कम कर देते हैं या वापस मुड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल चौड़ी सड़क बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साइनेज, पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत, स्पष्ट लेन मार्गदर्शन और सुरक्षित निकास व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि संकेत समय पर और स्पष्ट दिखाई दें तो चालक पहले ही आवश्यक निर्णय ले सकते हैं और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण के दौरान सड़क की डिजाइन, साइनेज, लेन प्रबंधन, निकास बिंदुओं और अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है। इसके आधार पर आवश्यक सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या कम हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंजीनियरिंग, स्पष्ट संकेतक, नियमित सुरक्षा ऑडिट और यातायात नियमों का सख्ती से पालन ही इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। गडकरी के इस निरीक्षण से एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
