फिल्म की शुरुआती योजना वर्ष 1983 में तैयार की गई थी। उस समय अभिनेता धर्मेंद्र इस परियोजना से मुख्य अभिनेता के रूप में जुड़े थे और निर्माण की जिम्मेदारी भी उनके पास थी। मुख्य अभिनेत्री के लिए शबाना आज़मी का चयन किया गया था। शुरुआती चरण में फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी और पहला शेड्यूल पूरा होने की चर्चा रही। उस दौर में फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना थी और इसे एक अलग शैली की एक्शन-ड्रामा फिल्म के रूप में देखा जा रहा था।
निर्माण के दौरान परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं। निर्देशन से जुड़े बदलाव, निर्माण संबंधी कठिनाइयों और अन्य कारणों के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। समय के साथ फिल्म पूरी तरह रुक गई और लंबे समय तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। कई वर्षों तक यह परियोजना फिल्म उद्योग में अधूरी योजनाओं के उदाहरण के रूप में याद की जाती रही।
करीब 17 वर्ष बाद इसी कहानी को नए रूप में दोबारा जीवित किया गया। इस बार मुख्य भूमिका में बॉबी देओल को चुना गया, जबकि रानी मुखर्जी फिल्म की नायिका बनीं। दिलचस्प बात यह रही कि जिस किरदार को कभी धर्मेंद्र निभाने वाले थे, वही भूमिका बाद में उनके बेटे बॉबी देओल के हिस्से आई। इस संयोग ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ा दी और इसे देओल परिवार के लिए एक खास परियोजना माना गया।
रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। शुरुआती दौर में इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहा और समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। टेलीविजन प्रसारण और बाद के वर्षों में भी फिल्म को अच्छी पहचान मिली। आज इसे बॉबी देओल के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है और उनके अभिनय की भी सराहना की जाती है।
फिल्म में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी के अलावा आशिष विद्यार्थी, फरीदा जलाल, सचिन खेडेकर और मलाइका अरोड़ा सहित कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। सभी कलाकारों के अभिनय और फिल्म की तेज रफ्तार कहानी ने इसे दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक्शन और भावनात्मक दृश्यों के संतुलन ने भी फिल्म को अलग पहचान दिलाई।
सिनेमा जगत में अक्सर ऐसी परियोजनाएं समय और परिस्थितियों के कारण अधूरी रह जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां वर्षों बाद भी अपनी मंजिल तक पहुंचती हैं। ‘बिच्छू’ इसका प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। लगभग दो दशक तक रुकी रहने के बावजूद जब यह फिल्म नए कलाकारों के साथ बड़े पर्दे पर आई तो दर्शकों ने इसे स्वीकार किया। यही कारण है कि आज भी इस फिल्म का नाम उन चुनिंदा फिल्मों में लिया जाता है, जिन्होंने लंबे इंतजार के बाद सफलता हासिल कर यह साबित किया कि अच्छी कहानी को समय की सीमाएं रोक नहीं सकतीं।
