घटना के बाद स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन द्वारा स्कूल की रसोई सील किए जाने के बाद प्रबंधन ने अभिभावकों से बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है। इसके बाद अधिकांश विद्यार्थी टिफिन लेकर स्कूल पहुंचे। घटना के प्रभाव के चलते स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी सामान्य दिनों की तुलना में कम दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रभावित बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंगलवार को चिकित्सकों की टीम कई बच्चों के घर पहुंची और उनकी स्वास्थ्य जांच की। इस दौरान डॉक्टरों ने बच्चों के अभिभावकों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी बच्चे की स्थिति गंभीर नहीं है। विभाग का कहना है कि प्रभावित विद्यार्थियों की निगरानी आगामी दिनों में भी जारी रहेगी ताकि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम को समय रहते रोका जा सके।
जानकारी के अनुसार बच्चों में पेट दर्द, उल्टी, घबराहट, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण देखने को मिले थे। चिकित्सकीय जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के संकेत पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है और सभी की हालत स्थिर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक सलाह देने के बाद घर पर ही निगरानी में रखा गया है।
घटना के बाद अभिभावकों में भी चिंता का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। प्रभावित विद्यार्थियों में अधिकांश बच्चे प्राथमिक कक्षाओं के बताए जा रहे हैं। अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कुछ विद्यार्थियों को अस्वस्थ महसूस होने पर एहतियातन घर भेजा गया था। इसके अलावा कई अभिभावकों ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें प्रशासन और स्कूल प्रबंधन तक पहुंचाईं। इसके आधार पर पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत निगरानी अभियान शुरू किया है।
मामले की जांच के दौरान जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रसोई में कुछ खाद्य सामग्री निर्धारित उपयोग अवधि से अधिक समय तक रखी हुई पाई गई। इसके बाद एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल की किचन को सील कर दिया गया। जांच टीम ने भोजन, मसाले, डेयरी उत्पाद, पानी और अन्य खाद्य सामग्री सहित कुल 23 नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे हैं।
अब पूरे मामले की दिशा प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे खाद्य पदार्थ, पानी या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की निगरानी कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
