परिजनों का आरोप है कि श्रीराम वर्मा की तबीयत खराब होने के बावजूद जेल प्रशासन ने उनके उपचार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने आरोप लगाया कि जेल के भीतर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया और आवश्यक इलाज नहीं कराया गया। मौत की खबर मिलते ही परिजन जेल पहुंचे और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
घटना के बाद जेल प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और मृत्यु के कारणों की जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार श्रीराम वर्मा अप्रैल 2026 में सामने आए एक हिंसक विवाद के मामले में आरोपी था। यह मामला जमीन संबंधी पुराने विवाद से जुड़ा हुआ था। शिकायत के अनुसार खेत पर मोटर चालू करने को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में दो पक्षों के बीच गंभीर झड़प में बदल गया था। आरोप था कि विवाद के दौरान गाली-गलौज, मारपीट और हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। आरोपियों पर धारदार हथियार और लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप लगाया गया था। इस घटना में कई लोगों को चोटें आई थीं और एक बुजुर्ग व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने विभिन्न आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की थी। इसी मामले में श्रीराम वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था।
अब जेल के भीतर हुई उनकी मौत ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। परिजन यह जानना चाहते हैं कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति क्या थी, उन्हें कब और किस प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई तथा उनकी तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए। उनका कहना है कि जेल प्रशासन को इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
घटना के बाद जेलों में बंद कैदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक अभिरक्षा में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रशासन पर होती है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और स्पष्ट तथ्य सामने आना बेहद आवश्यक होता है ताकि किसी भी तरह की आशंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।
फिलहाल मृतक के परिजन निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की सभी परिस्थितियों की जांच की जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कैदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही है।
