जिले की जल स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बीड जिले के 173 छोटे-बड़े जलाशयों और बांधों में अब केवल 16.11 प्रतिशत पानी शेष बचा है। इनमें से 81 जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं जबकि 79 जलाशय डेड स्टोरेज की स्थिति में पहुंच गए हैं। डेड स्टोरेज का अर्थ है कि वहां मौजूद पानी उपयोग योग्य नहीं रह गया है। केवल 13 जलाशयों में ही सीमित मात्रा में पानी बचा है जो आने वाले दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी माना जा रहा है।
जल संकट का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। कई गांवों में लोग पीने के पानी के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस संकट की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन वीडियो में ग्रामीण सूखे तालाबों के बीच गड्ढे खोदकर पानी निकालने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष की स्थिति बन गई है।
बढ़ते संकट को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी विवेक जॉनसन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पानी की चोरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल संरक्षण विभाग के साथ हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि अवैध रूप से पानी निकालने की शिकायत मिलने पर संबंधित स्थान का बिजली कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा। साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाएगी।
लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी शुरू कर दी हैं। वर्तमान में 12 गांवों और 14 बस्तियों में 19 टैंकरों के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा 109 गांवों में स्थित 221 निजी कुओं को अधिग्रहित कर जल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन लगातार जल स्रोतों की निगरानी कर रहा है और संकटग्रस्त क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पानी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में जल संरक्षण और पानी के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। बीड जिले का यह संकट देश के अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक चेतावनी है कि जल संसाधनों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
